अध्याय सप्तदश (17)
ओउम् श्रीपरमात्मने नमः अध्याय सप्तदश ( 1 7) ********************* इस प्रकार भगवान् के वचन सुनकर अर्जुन बोले , हे कृष्ण ! जो मनुष्य शास्त्रविधि को त्यागकर केवल श्रद्धा से युक्त हुए देवादिकों का पूजन करते हैं उनकी स्थिति फिर कौन - सी है ? क्या सात्विकी है ? अथवा राजसी अथवा तामसी है ? । 1 । इस प्रकार अर्जुन के पूछने पर श्रीकृष्ण भगवान् बोले , हे अर्जुन ! मनुष्यों की वह बिना शास्त्रीय संस्कारों के केवल स्वभाव से उत्पन्न हुई श्रद्धा सात्विकी और राजसी तथा तामसी ऐसे तीनों प्रकार की ही होती है , उसको तू मेरे से सुन । 2 । हे भारत ! सभी मनुष्यों की श्रद्धा उनके अन्तःकरण के अनुरूप होती है तथा यह पुरुष श्रद्धामय है , इसलिये जो पुरुष जैसी श्रद्धा वाला है , वह स्वयं भी वही है अर्थात् जैसी जिसकी श्रद्धा है , वैसा ही उसका स्वरूप है । 3 । उनमें सात्विक पुरुष तो देवों को पूजते हैं और राजस पुरुष यक्ष तथा राक्षसों को पूजते हैं तथा अन्य जो तामस मनुष्य हैं , वे प्रेत औ...

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