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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9

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  ओउम् श्रीपरमात्मने नमः नवम् अध्याय ( 9 ) ********************** उसके उपरान्त श्रीकृष्ण भगवान् बोले , हे अर्जुन ! तुझ दोषदृष्टिरहित भक्त के लिये इस परम गोपनीय ज्ञान को रहस्य के सहित कहूँगा कि जिसको जानकर तू दुःखरूप संसार से मुक्त हो जायेगा । 1 । यह ज्ञान   सब विद्याओं का राजा तथा सब गोपनीयों का भी राजा एवं अति पवित्र , उत्तम , प्रत्यक्ष फलवाला और धर्मयुक्त है , साधन करने को बड़ा सुगम और अविनाशी है । 2 । हे परंतप ! इस तत्वज्ञानरूप धर्म में श्रद्धारहित पुरुष मेरे को प्राप्त न होकर मृत्युरूप संसारचक्र में   भ्रमण करते हैं । 3 । हे अर्जुन ! मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्मा से यह सब जगत् जल से बर्फ के सदृश परिपूर्ण है और सब भूत मेरे अन्तर्गत संकल्प के आधार स्थित हैं इसलिये वास्तव में मैं उनमें स्थित नहीं हूँ । 4 । और वे सब भूत मेरे में स्थित नहीं हैं , किंतु मेरी योगमाया और प्रभाव को देख कि भूतों का धारण - पोषण करनेवाला और भूतों को उत्पन्न करनेवाला भी मेरा आ...