अध्याय 4 श्रीमद्भगवद्गीता
ओउम् श्रीपरमात्मने नमः श्रीमद्भगवद्गीता चतुर्थ अध्याय ************************ इसके उपरान्त श्रीकृष्ण महाराज बोले , हे अर्जुन ! मैंने इस अविनाशी योग को कल्प के आदि में सूर्य के प्रति कहा था और सूर्य ने अपने पुत्र मनु के प्रति कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु के प्रति कहा । 1 । इस प्रकार परम्परा से प्राप्त हुए इस योग को राजर्षियों ने जाना , परंतु हे अर्जुन ! वह योग बहुत काल से इस पृथ्वीलोक में लोप ( प्रायः ) हो गया था । 2 । वह ही यह पुरातन योग अब मैंने तेरे लिये वर्णन किया है , क्योंकि तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है , इसलिये तथा यह योग बहुत उत्तम और रहस्य अर्थात् अति मर्म का विषय है । 3 । इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णचन्द्र महाराज के वचन सुनकर अर्जुन ने पूछा , हे भगवन् ! आपका जन्म तो आधुनिक अर्थात अब हुआ है और सूर्यका जन्म बहुत समय पुराना है , इसलिये इस योग को कल्प के आदि में आपने कहा था यह मैं कैसे जानूँ ? । 4 । इसपर श्रीकृष्ण महाराज बोले , हे अर्जुन !...